ज़ोहेब खान…….रायपुर। रायपुर रेंज पुलिस ने ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 6 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी WhatsApp के माध्यम से फर्जी APK फाइल भेजकर लोगों का मोबाइल हैक कर लाखों की धोखाधड़ी कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपी दिल्ली, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और उत्तरप्रदेश तक फैल कर काम कर रहे थे।
इस नेटवर्क के तार पूरे देश में फैले होने के साक्ष्य मिले हैं।
पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा के निर्देशन में रेंज साइबर थाना रायपुर की टीम ने तकनीकी विश्लेषण कर आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की और विभिन्न राज्यों में दबिश देकर सभी को गिरफ्तार किया।
कैसे हैक करते थे मोबाइल?
19 वर्षीय आरोपी धर्मजीत सिंह फर्जी APK (एंड्रॉइड पैकेज फाइल) तैयार करता था, जिसमें मेलेशियस कोड एम्बेड कर मोबाइल को पूरी तरह हैक कर लिया जाता था।
ये APK सरकारी योजनाओं, बैंकों, RTO चालान, PM किसान, आयुष्मान कार्ड आदि के नाम पर तैयार किए जाते थे ताकि लोग भरोसा कर क्लिक कर दें।
धर्मजीत इन APK फाइलों को टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया ग्रुप में बेचता था, जहां 500 से अधिक साइबर अपराधी उससे जुड़े हुए थे। फिर हैकर इन फर्जी ऐप के लिंक WhatsApp ग्रुप में भेजकर लोगों को क्लिक करने के लिए उकसाते थे।
जैसे ही पीड़ित लिंक क्लिक कर ऐप इंस्टॉल करता—
मोबाइल पूरी तरह हैक
बैंक विवरण चोरी
अकाउंट से रकम ट्रांसफर
कॉन्टैक्ट लिस्ट में सभी को वही फर्जी लिंक भेज दिया जाता था
फंड फ्लो की कड़ी भी पकड़ी गई
मोबाइल हैक होने के बाद ठगी की रकम म्यूल खातों में भेजी जाती थी।
साइबर अपराधी सौरव, आलोक और चांद मोहम्मद इन खातों के माध्यम से रकम को आगे इरफान अंसारी (आसनसोल) तक पहुंचाते थे, जो ATM से कैश निकालकर राशि को आगे बढ़ाता था।
रायपुर के दो मामलों से खुली पूरे गैंग की परतें
प्रार्थी अर्चना भदौरिया को ‘RTOechallan.apk’
और
प्रार्थी महेश साहू को ‘PMkisanyojna.apk’
फाइल भेजी गई थी, जिससे दोनों के मोबाइल हैक कर क्रमशः 5.12 लाख और 12 लाख रुपये की ठगी की गई।
इन दोनों मामलों की जांच (अपराध क्रमांक 734/25 और 132/25) के आधार पर पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।
गिरफ्तार आरोपी
1. सौरव कुमार, बिहार – फर्जी कंपनी बनाकर बैंक अकाउंट खोलने का काम
2. आलोक कुमार, बिहार – म्यूल बैंक खाते इकट्ठा कर बेचता
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