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एनआईईएलआईटी उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण देने को शीर्ष कंपनियों से साझेदारी करे: वैष्णव

नयी दिल्ली.  इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बृहस्पतिवार को प्रौद्योगिकी शिक्षा संस्थान एनआईईएलआईटी से उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण देने के लिए शीर्ष 500 कंपनियों के साथ साझेदारी करने का आग्रह किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) को उद्योग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने पाठ्यक्रम तैयार करने चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘डिजिटल लर्निंग मंच बनाने का निर्णय तीन साल पहले लिया गया था और अब यह तैयार है। लंबे समय से हम वही पढ़ा रहे हैं जो हम जानते हैं, जबकि हमें वास्तव में वही पढ़ाना चाहिए जो उद्योग और छात्रों की जरूरत है।” वैष्णव ने एनआईईएलआईटी डिजिटल विश्वविद्यालय के पांच केंद्रों की शुरुआत करने के बाद अपने संबोधन में कहा, ‘‘समय आ गया है जब एनआईईएलआईटी जैसे संस्थानों को उद्योग की जरूरतों के हिसाब से पढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।” ये केंद्र मुजफ्फरपुर (बिहार), बालेश्वर (ओडिशा), तिरुपति (आंध्र प्रदेश), दमन (दादरा और नगर हवेली) और लुंगलेई (मिज़ोरम) में स्थित हैं। वैष्णव ने कहा, ‘‘एनआईईएलआईटी को शीर्ष 500 कंपनियों के साथ मिलकर काम करना चाहिए और उनकी जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने चाहिए।” इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सचिव एस कृष्णन ने कहा कि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का केंद्र बन सकता है और इसको लेकर काफी उत्साह है। एनआईईएलआईटी उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिभाओं को विकसित करने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी काफी प्रशिक्षण और प्रतिभा की जरूरत है, जहां संस्थान योगदान दे रहा है और अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान ने किंड्रिल, फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन, डिक्सन टेक्नोलॉजीज और माइक्रोसॉफ्ट जैसे कंपनियों के साथ कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

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