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स्टॉक मार्केट में फ्लैट एंट्री के बाद देव एक्सीलेरेटर के शेयरोें पर लगा अपर सर्किट

नई दिल्ली। ऑफिस स्पेस मुहैया कराने वाली कंपनी देव एक्सीलेरेटर के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में फ्लैट एंट्री करने के बाद लिवाली के बल पर अपर सर्किट लेवल तक पहुंच कर अपने आईपीओ निवेशकों को खुश कर दिया। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 61 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई पर इसकी लिस्टिंग मामूली बढ़त के साथ 61.30 रुपये के स्तर पर और एनएसई पर बिना किसी बदलाव के 61 रुपये के स्तर पर हुई। लिस्टिंग के बाद लिवाली के सपोर्ट से इस शेयर की चाल में तेजी आ गई, जिसके कारण थोड़ी देर बाद ही कंपनी के शेयर उछल कर 64.36 रुपये के अपर सर्किट लेवल तक पहुंच गया। इस तरह पहले दिन के कारोबार में कंपनी के आईपीओ निवेशकों को 5.51 प्रतिशत का मुनाफा हो गया।

देव एक्सीलेरेटर का 143.35 करोड़ रुपये का आईपीओ 10 से 12 सितंबर के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से शानदार रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 64 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन 20.30 गुना सब्सक्राइब हुआ था। वहीं, नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में 87.97 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इसी तरह रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन 164.89 गुना और एंप्लॉयीज के लिए रिजर्व पोर्शन 17.60 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इस आईपीओ के तहत 2 रुपये फेस वैल्यू वाले 2.35 करोड़ नए शेयर जारी किए गए हैं। आईपीओ के जरिये जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी नए सेंटर के सिक्योरिटी डिपॉजिट्स और फिट आउट्स के कैपिटल एक्सपेंडिचर में, अपने पुराने कर्ज के बोझ को कम करने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

कंपनी की वित्तीय स्थिति की बात करें तो प्रॉस्पेक्टस में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी को 12.83 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था, लेकिन अगले वित्त वर्ष 2023-24 में ही कंपनी फायदे में आ गई। इस वित्त वर्ष में कंपनी को 43 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ, जो 2024-25 में उछल कर 1.74 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का राजस्व 58 प्रतिशत वार्षिक से अधिक की चक्रवृद्धि दर (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़ कर 178.89 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी पर कर्ज लगातार बढ़ता गया। वित्त वर्ष 2022-23 के आखिर में कंपनी का कर्ज 33.20 करोड़ रुपये, जो वित्त वर्ष 2023-24 के आखिर में बढ़ कर 101.05 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह वित्त वर्ष 2024-25 के आखिर में कंपनी का कर्ज उछल कर 130.67 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

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