छत्तीसगढ़

रामानुजगंज की महिलाएं बना रहीं इको-फ्रेंडली दीये, दीपावली पर सजेंगे घर-आंगन

गोबर से कमाई की रोशनी:

बलरामपुर। छत्तीसगढ़ केबलरामपुर-रामानुजगंज जिले में इस बार दीपावली की रौनक कुछ अलग ही होने वाली है। जहां एक ओर लोग घरों की सफाई और सजावट में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर रामानुजगंज की महिलाएं गोबर और मिट्टी से ऐसे इको-फ्रेंडली दीये तैयार कर रही हैं, जो न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल हैं बल्कि महिलाओं की आजीविका का उजियारा भी बढ़ा रहे हैं।

दशहरा के समापन के बाद अब पूरा क्षेत्र दीपावली की तैयारियों में रंग चुका है। हर ओर रोशनी, उमंग और सजावट का माहौल है। हिंदू धर्म में दीपावली का पर्व कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है, और पंचांग गणना के अनुसार इस वर्ष कार्तिक अमावस्या 20 अक्टूबर 2025 को पड़ेगी। लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त 20 अक्टूबर को दोपहर 3:44 बजे से शुरू होकर 21 अक्टूबर शाम 5:54 बजे तक रहेगा।

इसी बीच रामानुजगंज स्थित एसआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) केंद्र से जुड़ा प्रगति वन स्व-सहायता समूह की महिलाएं इन दिनों दीपावली की तैयारी को एक नए रूप में सजा रही हैं। यह महिलाएं बीते चार वर्षों से गोबर और मिट्टी से सुंदर, टिकाऊ और इको-फ्रेंडली दीये बना रही हैं। इन दीयों को और आकर्षक बनाने के लिए महिलाएं रंग-बिरंगे कलर और पारंपरिक डिज़ाइन का इस्तेमाल करती हैं।

मार्केट में इन दीयों की मांग लगातार बढ़ रही है। जैसे ही ये दीये दुकानों में पहुंचते हैं, कुछ ही घंटों में बिक जाते हैं। महिलाओं का कहना है कि इस काम से न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ती है, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी मिलता है।

एसआरएलएम प्रभारी विनोद केशरी बताते हैं कि, हमारे केंद्र से जुड़ी महिलाएं आमतौर पर डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण का काम करती हैं। लेकिन दीपावली के समय ये अतिरिक्त गतिविधियों में हिस्सा लेकर गोबर और मिट्टी से सुंदर दीये बनाती हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी होती है और यह पर्यावरण की दृष्टि से भी बेहद उपयोगी है।

उन्होंने आगे बताया कि पिछले वर्ष महिलाएं दो रुपये प्रति दीया बेचती थीं, जबकि इस बार महंगाई और कच्चे माल के बढ़ते खर्च को देखते हुए दीयों की कीमत तीन रुपये रखी गई है।

रामानुजगंज की इन महिलाओं ने साबित कर दिया है कि यदि लगन और रचनात्मकता हो, तो गोबर जैसी साधारण वस्तु भी कमाई का साधन बन सकती है। इस दीपावली पर जब घर-आंगन में इनके बनाए दीये जलेंगे, तो न सिर्फ रोशनी फैलेगी बल्कि महिलाओं के परिश्रम और आत्मनिर्भरता की चमक भी चारों ओर बिखरेगी।

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