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राजधानी रायपुर में बदहाली की मिसाल बना कुकुर बेड़ा तालाब

करोड़ों के सौंदर्यीकरण की हकीकत: बदबू, बीमारी और गंदगी में जीने को मजबूर ग्रामीण

नरेंद्र बंजारे……..रायपुर। राजधानी रायपुर के आमानाका क्षेत्र के समीप स्थित कुकुर बेड़ा तालाब की हालत दिन-ब-दिन बद से बदतर होती जा रही है। एक ओर जहां राजधानी के तालाबों के सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुकुर बेड़ा के ग्रामीण ऐसे गंदे और बदबूदार पानी का उपयोग करने को मजबूर हैं, जिसमें न तो इंसान तो दूर, जानवर भी नहाना पसंद नहीं करें।

 

तालाब में फैली गंदगी, कचरा और सड़ांध ने पूरे इलाके को बीमारी का केंद्र बना दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि तालाब की नियमित सफाई नहीं होने के कारण कई ग्रामीण बीमार पड़ चुके हैं, वहीं कुछ लोगों को तालाब में नहाने के चलते चर्म रोग जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा है। पानी का रंग पूरी तरह हरा हो चुका है और उसमें तरह-तरह के हानिकारक कीटाणु पनप रहे हैं।

 

ग्रामीणों का कहना है कि राजनीतिक दबंगों और रसूखदारों के लालच के चलते इस तालाब की ओर न तो शासन का ध्यान है और न ही नगर निगम की। आरोप है कि तालाब का मालिक मछली पालन के जरिए मुनाफा तो जमकर कमाता है, लेकिन जब सफाई और रख-रखाव की जिम्मेदारी आती है तो वह “मिस्टर इंडिया” बनकर गायब हो जाता है। वहीं मछली पकड़ने का समय आते ही फिर से सक्रिय हो जाता है।

 

मजबूरी में ग्रामीणों ने वर्ष 2023 में आपसी सहयोग से तालाब की सफाई करवाई, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा और लापरवाही के चलते हालात फिर जस के तस हो गए। आज स्थिति यह है कि बदबू, मच्छर और गंदगी के कारण आसपास के लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन इस तालाब की सुध लेगा, या फिर कुकुर बेड़ा के ग्रामीण यूँ ही बीमारी और गंदगी के बीच जीने को मजबूर रहेंगे?

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